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Sunday, July 27, 2014

तेरी आँखें...



ना जाने कौनसी कशिश है तेरी आँखो में,
ना होते हुए भी तेरे होने का एहसास दे जाती है,
खामोश रहते है मेरे लब हमेशा और
तेरी आँखो की चमक इन्हे अल्फाज दे जाती है...

2 comments:

  1. वाह, बहोत खूब कहा अपने आँखों के बारे में, गर आँखें ना होती तो उनसे इश्क़ भी ना होता!

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